Our Courses | Shree Sadhna Gurukul
Our Courses

Let's Check Our Courses

Gurukul offers state-of-the-art classrooms, spacious libraries, modern sports facilities, peaceful meditation zones, and a dedicated staff to provide a nurturing environment for academic, physical, and spiritual growth of students.

गनेश पूजन

गनेश पूजन

📿 गणेश पूजन का महत्व
किसी भी नए कार्य, व्यापार, विवाह, गृह प्रवेश या यज्ञ से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।
माना जाता है कि उनकी पूजा करने से सभी विघ्न दूर होते हैं।
वे सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करते हैं।
विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणेश जी की विशेष पूजा और स्थापना की जाती है।

Read More
षोडश मातृका

षोडश मातृका

[" षोडश मातृका का धार्मिक महत्व"]
षोडश मातृकाएँ देवी शक्ति के विभिन्न रूप हैं। ये माताएँ जीवन की रक्षा करती हैं, संतानों की वृद्धि करती हैं और नकारात्मक शक्तियों से संरक्षण देती हैं। विशेष रूप से गणेश पूजन, गृह प्रवेश, विवाह और संस्कारों में इनका पूजन किया जाता है।
["षोडश मातृकाओं के नाम"]
सामान्य रूप से षोडश मातृकाओं के नाम इस प्रकार माने जाते हैं:
ब्राह्मी,माहेश्वरी,कौमारी,वैष्णवी,वाराही
इन्द्राणी (ऐन्द्री),चामुण्डा,महालक्ष्मी,महाकाली
सरस्वती,सावित्री,गायत्री,पार्वती,दुर्गा,अम्बिका
ललिता

Read More
सप्त घृत मातृका

सप्त घृत मातृका

📿 “सप्त” का अर्थ
“सप्त” का अर्थ है सात, अर्थात् इस साधना में सात मातृ शक्तियाँ सम्मिलित होती हैं।

Read More
नवघ्रह पूजन

नवघ्रह पूजन

नवग्रह पूजन हिंदू धर्म की एक महत्वपूर्ण वैदिक पूजा है, जिसमें ब्रह्मांड के नौ प्रमुख ग्रहों की शांति, कृपा और अनुकूलता हेतु पूजा की जाती है। नवग्रह मानव जीवन, प्रकृति और कर्मफल पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इस पूजन का उद्देश्य ग्रहदोष शांति, बाधा निवारण और सुख-समृद्धि की प्राप्ति है।
नवग्रह पूजन का उद्देश्य
ग्रहों की अशुभ दशा को शांत करना
कुंडली में उपस्थित ग्रह दोषों का निवारण
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं का समाधान

Read More
पंच देव पूजन

पंच देव पूजन

पंचदेव पूजन हिंदू धर्म की एक अत्यंत प्राचीन एवं महत्वपूर्ण पूजा विधि है। इसमें पाँच प्रमुख देवताओं की सामूहिक उपासना की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से संतुलित जीवन, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए की जाती है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित पंचायतन पूजा परंपरा इसी पर आधारित है।
ब्रह्मा
विष्णु
शिव
लक्ष्मी
सरस्वती

Read More
पित्रार्चन पूजन { नांदी श्राध्ध सहित }

पित्रार्चन पूजन { नांदी श्राध्ध सहित }

इस पूजन से पितृगण तृप्त होते हैं और परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
पितृ अर्चन का अर्थ
पितृ = माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी तथा सभी पूर्वज
अर्चन = विधिपूर्वक पूजा, तर्पण और स्मरण
अर्थात् पूर्वजों का विधिवत पूजन एवं तर्पण।

Read More
ईशान रुद्र कलश पूजन

ईशान रुद्र कलश पूजन

रुद्र कलश पूजन भगवान शिव के रुद्र स्वरूप को प्रसन्न करने हेतु किया जाने वाला एक अत्यंत पावन वैदिक–तांत्रिक अनुष्ठान है। यह पूजन विशेष रूप से रोग निवारण, ग्रह दोष शांति, भय मुक्ति, मानसिक शांति, एवं समस्त कष्टों के नाश के लिए किया जाता है।

Read More
कलश स्थापना पूजन

कलश स्थापना पूजन

कलश का धार्मिक महत्व
कलश में समस्त देवी-देवताओं, तीर्थों एवं लोकों का वास माना गया है।
कलश सृष्टि, समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल ऊर्जा का प्रतीक है।
जल जीवन का आधार है, अतः कलश में भरा जल अमृततुल्य माना जाता है।

Read More
प्रधान देवता स्थापना

प्रधान देवता स्थापना

प्रधान देवता का अर्थ
जिस देवता की पूजा किसी अनुष्ठान, यज्ञ, व्रत या विशेष पूजन में मुख्य रूप से की जाती है, वही प्रधान देवता कहलाते हैं। जैसे—
रुद्र यज्ञ में भगवान शिव
सत्यनारायण व्रत में भगवान विष्णु
गणपति पूजन में भगवान गणेश
दुर्गा पूजन में माँ दुर्गा

Read More
Inquiry

Have Any Questions? Contact Us

Fill out the form and our team will get back to you as soon as possible.