प्रधान देवता स्थापना

प्रधान देवता का अर्थ जिस देवता की पूजा किसी अनुष्ठान, यज्ञ, व्रत या विशेष पूजन में मुख्य रूप से की जाती है, वही प्रधान देवता कहलाते हैं। जैसे— रुद्र यज्ञ में भगवान शिव सत्यनारायण व्रत में भगवान विष्णु गणपति पूजन में भगवान गणेश दुर्गा पूजन में माँ दुर्गा

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प्रधान देवता स्थापना

Description:
जिस देवता को किसी पूजा, अनुष्ठान, यज्ञ या व्रत में मुख्य रूप से पूजित किया जाता है, वही प्रधान देवता कहलाते हैं।
पूरी पूजा उसी देवता की कृपा प्राप्ति के लिए की जाती है।
उदाहरण
रुद्राभिषेक / रुद्र यज्ञ → भगवान शिव
सत्यनारायण व्रत → भगवान विष्णु
दुर्गा पूजन / नवचंडी → माँ दुर्गा
गणपति पूजन → भगवान गणेश
प्रधान देवता के षोडशोपचार
आवाहन,आसन,पाद्य,अर्घ्य,आचमन,स्नान,वस्त्र,यज्ञोपवीत ,गंध,पुष्प,धूप,दीप,नैवेद्य,ताम्बूल,
दक्षिणा,नमस्कार / प्रार्थना
प्रधान देवता स्थापना का उद्देश्य
प्रधान देवता स्थापना का उद्देश्य पूजन स्थल पर देवता का
आवाहन (आमंत्रण)
प्रतिष्ठा (स्थिर निवास)
सन्निधि (साक्षात उपस्थिति)
स्थापित करना है, जिससे सम्पूर्ण पूजा फलदायी हो।

Duration: 4 स्प्ताह

Fees: free

Skills Gained: प्रधान देवता की विधिपूर्वक स्थापना एवं पूजन करने से साधक, पुरोहित एवं यजमान में निम्नलिखित आध्यात्मिक, मानसिक एवं व्यवहारिक कौशल विकसित होते हैं /