नवग्रह पूजन हिंदू धर्म की एक महत्वपूर्ण वैदिक पूजा है, जिसमें ब्रह्मांड के नौ प्रमुख ग्रहों की शांति, कृपा और अनुकूलता हेतु पूजा की जाती है। नवग्रह मानव जीवन, प्रकृति और कर्मफल पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इस पूजन का उद्देश्य ग्रहदोष शांति, बाधा निवारण और सुख-समृद्धि की प्राप्ति है। नवग्रह पूजन का उद्देश्य ग्रहों की अशुभ दशा को शांत करना कुंडली में उपस्थित ग्रह दोषों का निवारण जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं का समाधान
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Description:
नवग्रह पूजन का उद्देश्य
ग्रहदोष, कालसर्प दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या का शमन
मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति
स्वास्थ्य, धन, शिक्षा, विवाह और संतान सुख में वृद्धि
जीवन में स्थिरता, सफलता और सौभाग्य
📿 नवग्रह पूजन की विधि (संक्षेप में)
संकल्प – पूजा करने वाले द्वारा मनोकामना के साथ संकल्प लिया जाता है
गणेश पूजन – विघ्नों के नाश हेतु
कलश स्थापना – पवित्रता और देव आह्वान के लिए
नवग्रह आवाहन – मंत्रों द्वारा नवग्रहों का आह्वान
नवग्रह पूजन – पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप-दीप, नैवेद्य अर्पण
नवग्रह मंत्र जप – प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र या वैदिक मंत्र
हवन – ग्रह शांति हेतु अग्नि में आहुति
आरती व प्रसाद वितरण
🕉️ नवग्रह पूजन का श्रेष्ठ समय
ग्रहों की महादशा/अंतरदशा
जन्मदिन, ग्रहण काल, अमावस्या, पूर्णिमा
सोमवार, गुरुवार, शनिवार (ग्रह अनुसार)
🌺 नवग्रह पूजन से प्राप्त लाभ
ग्रहों की अनुकूलता से जीवन में उन्नति
मानसिक तनाव, भय और बाधाओं से मुक्ति
निर्णय क्षमता, आत्मविश्वास और सौभाग्य में वृद्धि
आध्यात्मिक उन्नति और कर्म शुद्धि
Duration: 3 सप्ताह
Fees: free
Skills Gained: ✨ समग्र रूप से नवग्रह पूजन से विकसित होने वाले प्रमुख कौशल आत्मनियंत्रण और मानसिक मजबूती सकारात्मक सोच और संतुलित व्यक्तित्व निर्णय लेने की स्पष्टता जीवन प्रबंधन एवं आध्यात्मिक अनुशासन