📿 “सप्त” का अर्थ “सप्त” का अर्थ है सात, अर्थात् इस साधना में सात मातृ शक्तियाँ सम्मिलित होती हैं।
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Description:
🔱 सप्तघृत मातृकाओं के नाम व स्वरूप
ब्राह्मी –
ज्ञान, विद्या और बुद्धि की अधिष्ठात्री।
घृत अर्पण से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
माहेश्वरी –
साहस, धैर्य और आत्मबल की देवी।
भय एवं मानसिक दुर्बलता दूर करती हैं।
कौमारी –
शुद्धता, संयम और ब्रह्मचर्य की प्रतीक।
आत्मनियंत्रण व ऊर्जा का विकास।
वैष्णवी –
पालन-पोषण और संरक्षण की शक्ति।
जीवन में संतुलन और स्थिरता लाती हैं।
वाराही –
भौतिक बाधाओं और शत्रु नाश की देवी।
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा।
इंद्राणी (ऐंद्री) –
ऐश्वर्य, नेतृत्व और आत्मविश्वास की दात्री।
मान-सम्मान और सफलता प्रदान करती हैं।
चामुण्डा –
तामसिक शक्तियों का नाश करने वाली।
रोग, भय और अशुभ प्रभावों से मुक्ति।
🌼 आध्यात्मिक लाभ
मन और बुद्धि की शुद्धि
रोग एवं नकारात्मकता से रक्षा
साधना में स्थिरता
आत्मबल और तेज की वृद्धि
गृह, परिवार व कार्यक्षेत्र में शांति
Duration: 1 सप्ताह
Fees: free
Skills Gained: 🌸 सप्तघृत मातृका से प्राप्त कौशल 🌸 सप्तघृत मातृका साधना व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर विशेष क्षमताओं का विकास करती है।