पित्रार्चन पूजन { नांदी श्राध्ध सहित }

इस पूजन से पितृगण तृप्त होते हैं और परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। पितृ अर्चन का अर्थ पितृ = माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी तथा सभी पूर्वज अर्चन = विधिपूर्वक पूजा, तर्पण और स्मरण अर्थात् पूर्वजों का विधिवत पूजन एवं तर्पण।

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पित्रार्चन पूजन { नांदी श्राध्ध सहित }

Description:
पितृ अर्चन का महत्व
शास्त्रों के अनुसार—
“पितृणां तृप्तिः पुत्राणां पुष्टिकारिणी।”
अर्थात पितरों की तृप्ति से संतान का जीवन सुखी, समृद्ध और बाधामुक्त होता है।
पितृ अर्चन से लाभ
✔ पितृ दोष शांति
✔ वंश वृद्धि और संतान सुख
✔ रोग, ऋण व मानसिक कष्टों से मुक्ति
✔ घर में शांति और समृद्धि
✔ भाग्य और कार्यों में सफलता
🔸 पितृ अर्चन करने का उपयुक्त समय
पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) – विशेष फलदायी
अमावस्या (विशेषकर पितृ अमावस्या)
महालय तिथि
ग्रहण काल के बाद
मृत्यु तिथि (बरसी)
🔸 विशेष मंत्र
पितृ गायत्री मंत्र
“ॐ पितृदेवतायै विद्महे जगत्प्राणाय धीमहि। तन्नो पितरः प्रचोदयात्॥”
🔸 पितृ अर्चन के बाद प्राप्त सिद्धियाँ (फल)
पितृ दोष से मुक्ति
जीवन की अकारण बाधाएँ समाप्त
संतान, विवाह व धन संबंधी समस्याओं में सुधार
घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

Duration: 4 सप्ताह

Fees: free

Skills Gained: पितृ अर्चन पूजन से प्राप्त कौशल व्यक्ति को ✔ भीतर से मजबूत ✔ कर्मिक रूप से शुद्ध ✔ पारिवारिक रूप से संतुलित ✔ और आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनाते हैं।